सँभल ऐ दिल

जब कभी मेरे पतिदेव किसी जिरह में मुझसे हार जाते हैं तो कहते हैं- “तुमसे कोई नहीं जीत सकता।”

बस इसी ब्रह्मवाक्य के भरोसे मैंने कॉंटेस्ट के लिए किताब लिख डाली है। आप सब पर ज़िम्मेदारी है, इस पूरे यूनिवर्स पर ज़िम्मेदारी है कि कन्स्पिरसी करे और मुझे जिताए।

इस शनिवार और रविवार किताब ऐमज़ॉन पर फ़्री डाउनलोड के लिए उपलब्ध रहेगी। तो लग जाइए काम पर। ख़ुद डाउनलोड करिए और परिवारजनों तथा मित्रों को भी डाउनलोड करवा दीजिए। दुश्मनों को भी ना बख्शें। अकेले आप ही क्यूँ डसे जाएँ? बाँटने से दुःख हल्का हो जाता है। तो सबमें बाँट दीजिए।

लागी छूटे ना

दीपक की याद तो बहुत आती, लेकिन यह दुआ करने में उसके होंठ कांपते थे कि दीपक लौट आये। दीपक के लौट आने के ख़याल से मालती डर क्यूँ रही थी?

भटकन

कुछ गर्म साँसें, एक किस और एक टाइट हग इससे ज़्यादा क्या चाहिए तुझे भटकने को ए लड़की?

ऐसा ही हर घर में होता होगा!

अध्यापिका से नज़रें मिलाने की हिम्मत नहीं हुई हीरा की, लेकिन उनकी मौन स्वीकृति ने एक और ठप्पा लगा दिया कि सचमुच ऐसा ही हर घर में होता होगा।

लेकिन फिर भी

है चूल्हे भर आग मेरी झोली में
लेकिन, फिर भी, सूरज की आशा करती हूँ
देखो, मैं अब भी सपने बुनती हूँ

फ्रीज़्ड

उस पल मैंने महसूस किया कि मेरा पूरा शरीर धुक धुक कर रहा था. ऐसा लग रहा था कि मैं भरभराकर गिरने वाली हूँ. मैंने सोचा- “that’s it? काम खल्लास?” अभी भी मैं अपनी नश्वरता को स्वीकार नहीं कर पा रही. “It is okay to die. Everyone has to”

आप यूँ फ़ासलों से गुज़रते रहे…

उसके मुँह से “क्या हुआ” यह सुनना भी इतना लज़ीज़ होता था कि जान बूझकर ख़ुद को चुटहिल कर लेने में भी एक लज्जत महसूस होती थी मुझे.