इक बूँद रंग में समंदर रंगा -१

कैसा होता है ना प्यार में!! राधा कान्हा बन जाती है और श्याम राधिका…. आज भी वही हो रहा है… पराग हिना हो गया और हिना पराग.

बोलती आँखें और तस्वीर

एक बार किसी ने पूछ लिया ‘उसकी तो मूँछें हैं ना?’ मेरे पास कोई जवाब न था । बहुत ज़ोर देने पर भी ध्यान ही नहीं आता था कि मूँछ है कि नहीं ।

कोई देखे

क्षण भर में अनगिनत उतार-चढ़ाव पर सधते सुर जैसे उसके दिमागी असंतुलन का रूपक हैं, जो उमींद और मायूसी में लड़खड़ा रहा है । नायिका इस समय अन्दर ही अन्दर बिखर रही है,

यह मेरा दीवानापन है

क्या धमकी है ! क्या बदलाखोरी है ! क्या इरादा है ! क्या रोमांस है ! क्या दर्द है ! क्या जूनून है ! क्या वहशत है ! क्या दहशत है !

कैसी ज़िद्द

कीमत में यह दर्द और ज़हर है तो
हर रोज़, हर पल पीना है मुझे
फिर क्यूँ भुला दूँ तुझे?

महकती तन्हाईयाँ

उसके अपने खून में उसका पूरा बदन, उसके कपडे तर हो रहे थे, उसके मुँह से एक दर्दनाक चीख निकली। उसने घबराकर चारों ओर नज़रें घुमाई लेकिन….

चरित्रहीन …७

तुम समरक्षेत्र में खड़े हो पार्थ, एक ओर तुम्हारा सत्य है जो सुधा के लिए असह्य है और दूसरी ओर सुधा के लिए तुम्हारा उत्तरदायित्व है । एक पक्ष में तुम्हारी इमानदारी और दूसरे पक्ष में तुम्हारी सुधा है । चयन तुम्हारा है पार्थ ।‘

चरित्रहीन …६

उसकी तेज़ साँसों को महसूस करना, उसके नाजुक होंठों को घुलते हुए महसूस करना, उसकी धडकनों में अपना नाम सुनना और ….. ऐसा लगता था प्यार की दहकती हुई गरमी में पिघलकर ही दिल को ठंडक पड़ेगी ।