चरित्रहीन ..४

कृष्णा दूर क्षितिज में देखते हुए दर्द से बोले, ’यदि मैं चाहता, तो क्या राधे को अपने पास रोक लेने से कोई शक्ति मुझे रोक लेती ? किन्तु यह चाहना ही मेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर था पार्थ ।‘

चरित्रहीन…३

मेरी सुधा मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ । हर रूप में, हर हाल में । तभी सुधा ने उलाहना दिया, ‘फिर क्यूँ उस डायन मालती के पीछे खुद को गिराते हो, वो प्यार नहीं वासना है ।’ 

ताक़त की दुनिया….२

कितनी सज़ा? कितना बड़ा गुनाह था कि सज़ा और प्राश्यचित खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे ? अब बस, और नहीं ।

ताक़त की दुनिया

पता है कुछ लोग अपने जीवन की जिम्मेदारी नहीं उठा सकते हैं- न जीने की और न मरने की । उन्हें जीने के लिए दूसरों का सहारा चाहिए होता है और अपनी खुदखुशी का इल्ज़ाम भी वो दूसरों पर थोप जाते हैं । तू उन लोगों में से है ।

आनंदी और गोपाल- भाग २

यह दोनों ही अपनी-अपनी दुनिया के सेलेब्रिटी थे और इन दोनों की दुनिया में कोई तालमेल नहीं था। कैसी अजब विडम्बना थी यह कि इस विवाह से जहाँ आनंदी के मन में कोमलता बढ़ रही थी वहीँ गोपाल के मन में निर्ममता घर कर रही थी।

आनंदी और गोपाल- भाग १

नयी जवानी में कोई यह बीज डाल भर दे तो मन न जाने कितने मीठे-मीठे फलों तक जा पहुंचता है। गोपाल के मन में भी शादी के लड्डू फूटने लगे कि उसकी शादी ऐसी लड़की से होगी जो पढ़ी लिखी, ख़ूबसूरत और स्मार्ट शहरी होगी।

गोपाल लौट आया

एक पल में उसने निर्णय तो कर लिया शहीद होने का मगर यह न समझ पाया कि शहादत जान ले ले तो आसान होती है कम से कम शहीद के लिए । लेकिन ऐसी शहादत जो जान भी न ले और जीने भी न दे वो भयावह होती है । शहीद का गुणगान होता है लेकिन जो जीता जगाता शहीद हो उसका क्या गुणगान ?