माँ सरस्वती, प्लीज़ अपने कमल से मत उठिए

कभी-कभी माँ सरस्वती अपने कमल को छोड़कर जिह्वा पर आ विराजती हैं, ऐसा मत हमारी संस्कृति में प्रचलित है । इसी मत के तहत बुरी बातें कहने को अक्सर मना किया जाता है ।

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मैं हूँ ना, माँ

इतनी स्वार्थी….इतनी बीमार हो गयी मैं? मेरी बेटी स्कूल जाकर भी इस ख़याल से छूट नहीं पायी कि माँ ने उससे कहा ,’ तुम्हें पता है माँ बीमार है फिर भी तंग करती हो’ । बालमन पर यह कैसा बोझ रख दिया मैंने अनजाने में ?

मुजरिम हाज़िर हो

‘हाँ, जब तुम्हें पापा अच्छे लगे तो तुम इनका इंटरव्यू कर लेती । और पास होने पर शादी का डिसाइड करती वर्ना बस बॉयफ्रेंड बना लेती । किसी और का इंटरव्यू लेती और उससे शादी कर लेती ।‘

इमली और अमरख

खुश रहने में, जुगाड़ निकालने में और कहानियाँ बनाने में बचपन का कोई सानी नहीं। और इसीलिए मन बार-बार उन गलियों में घूमने निकल पड़ता है जहाँ का वो सिकंदर है।

बचपन का किस्सा – प्रभु दर्शन

मेरा निष्पाप, निर्दोष, निर्विकार और अबोध मन साक्षी है कि मैं केवल गीत संगीत का रस लेने के उद्देश से गा रही थी । मुझे तनिक सा भी बोध न था कि प्रभु वाक़ई सीरियस हो जायेंगे और आनन-फानन दर्शन की योजना भी बना लेंगे ।

उड़ान की तैयारी

आज तक बेटी पर मुझसे ज्यादा अधिकार किसी का न था लेकिन अब धीरे-धीरे पतंग को आसमान बुला रहा है ।

पेरेंटिंग ज्ञान

अक्सर पढ़ने में आता है कि माँ-पापा बच्चे के आदर्श होते हैं । बच्चे उनके आचरण से सीखते हैं ना कि उनके मुहँ से निकले ज्ञान वचनों से । मैं एक छः वर्षीया कन्या की माँ हूँ और अपने अनुभव से आपको सचेत करना चाहती हूँ कि इन बातों में कदापि ना आयें ।

भिक्षाम्देही भिक्षाम्देही

कल एक बालक देखा किसी ट्रेफिक सिग्नल पे । कितना मस्त था अपने आप में । उसे कोई आभास नहीं था खुदके उस सड़क पे होने का और दूसरों के गाड़ी में होने का । उसे कोई दुःख नहीं था,

Park or Stairs?

Yesterday, I saw a mother trying hard to convince her baby to buy a chocolate and her baby was insisting to buy Eclairs. Both had their reason to insist. I loved their squabble and it took me back to Jan 2013, where I and my daughter had a similar tussle.