निष्प्राण शब्द

यह सब क्या हो गया ! कहाँ गया सब कुछ ? किसने हैक कर लिया मेरा सॉफ्टवेयर ? क्या वायरस है यह ? गीत बढ़ता जा रहा है

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माँ सरस्वती, प्लीज़ अपने कमल से मत उठिए

कभी-कभी माँ सरस्वती अपने कमल को छोड़कर जिह्वा पर आ विराजती हैं, ऐसा मत हमारी संस्कृति में प्रचलित है । इसी मत के तहत बुरी बातें कहने को अक्सर मना किया जाता है ।

मैं हूँ ना, माँ

इतनी स्वार्थी….इतनी बीमार हो गयी मैं? मेरी बेटी स्कूल जाकर भी इस ख़याल से छूट नहीं पायी कि माँ ने उससे कहा ,’ तुम्हें पता है माँ बीमार है फिर भी तंग करती हो’ । बालमन पर यह कैसा बोझ रख दिया मैंने अनजाने में ?

चरित्रहीन

कभी रुक्मिणी को बताया कि तेरा हृदय जब-तब कालिंदीकूल के कदम्ब पर टिकी अपनी राधे के पास चला जाता है ? उस वेदना की अनुभूति तो ज़रूर होती होगी जो तुम दोनों के अस्तित्व का पर्याय बन गयी । कभी रुक्मिणी से बात करते-करते उसे राधे कहने की भूल हुई ?

ताक़त की दुनिया….२

कितनी सज़ा? कितना बड़ा गुनाह था कि सज़ा और प्राश्यचित खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे ? अब बस, और नहीं ।

आज़ाद कश्मीर !!! कर दें ?????

यदि जम्मू-कश्मीर का इतिहास देखें तो पता चलता है कि इस राज्य ने आज़ादी के समय भारत और पाकिस्तान दोनों की ही प्रभुता मानने से इन्कार कर दिया था ।

शिव के साथ वार्तालाप -२

तुम चुप क्यूँ हो ? कुछ तो कहो । कैसे मुस्कुराते पाते हो, शांत रह पाते हो ? क्या ताण्डव भूल चुके हो ?

भगत सिंह की उम्मींदों की स्याही

कल गुरदास मान जी का नया म्यूजिक विडियो देखा । आधुनिक काल की विसंगतियों को संक्षिप्त तौर पे दर्शाते हुए बहुत ही ह्रदयस्पर्शी, मार्मिक और बेहतरीन विडियो बन पड़ा है ।

मेरे राज और सिमरन

तुमसे बढ़के दुनिया में ना देखा कोई और जुबान पर आज दिल की बात आ गयी ।
अगर कोई आशिक़ यह गीतअपनी महबूबा को नज़र कर दे तो उस महबूबा की ख़ुशी, नाज़ और शर्म का कोई किनारा आपको ढूंढें नहीं मिलेगा ।

मैं आभार कहाँ से लाऊँ?

आज सुबह की ठंड में कुछ ठिठुरन के साथ सिहरन भी है, अनमने से ह्रदय में चुभते कुछ सवालों के दंश भी हैं। मन में अंतर्दव्न्द छिड़ा हुआ है । एक “क्यूँ” बन्दर की तरह उत्पात मचा कर हर डाली को झिंझोर रहा है और सारे फलों को जूठन कर फेंक रहा है । मन में एक उलझन…