उलझने..बेसब्रियाँ

अगर यह एहसास इंसान के लिए इतने ज़रूरी ही हैं तो यह ऐसे ग़ैर-ज़रूरी क्यूँ लगते हैं ? डरावने क्यूँ लगते हैं ? किसके लिए अच्छी है हार ? किसको सुहाता है दुःख ?

आज़ाद कश्मीर !!! कर दें ?????

यदि जम्मू-कश्मीर का इतिहास देखें तो पता चलता है कि इस राज्य ने आज़ादी के समय भारत और पाकिस्तान दोनों की ही प्रभुता मानने से इन्कार कर दिया था ।

सेक्स को सेक्स ही रहने दो…

यदि प्रकृति ने किसी भी प्रजाति को सेक्स ज्ञान न दिया होता तो यह सृष्टि आगे ही न बढ़ी होती लेकिन प्रकृति ने मनुष्य के अतिरिक्त सभी प्रजातियों के लिए सेक्स और प्रजनन का साल में एक समय अन्तराल निर्धारित किया है ।

कल शहीद दिवस था

कल शहीद दिवस था । मेरा फेसबुक एकाउंट भी बाकी देशवासियों के फेसबुक एकाउंट की तरह भावभीनी श्रद्धांजलि के संदेशों से भर गया ।

जय जय शिव शंकर

ओ जय जय शिव शंकर

काँटा लागे ना कंकड़

यह प्याला तेरे नाम का पिया ।

भगत सिंह की उम्मींदों की स्याही

कल गुरदास मान जी का नया म्यूजिक विडियो देखा । आधुनिक काल की विसंगतियों को संक्षिप्त तौर पे दर्शाते हुए बहुत ही ह्रदयस्पर्शी, मार्मिक और बेहतरीन विडियो बन पड़ा है ।

जंगली फूल

इस बार अपनी बेटी को लेकर अपने गावं गयी तो पहाड़ी रास्तों पर ठंडी हवा और खिली हुई धूप के साथ चलना बहुत सुकून दे रहा था दिल को । पहाड़ो को काटकर बनायीं गयी कच्ची सड़के गवाही दे रही थी

खोया – पाया

जब से मैंने ब्लॉगिंग की दुनिया में कदम रखा है तब से इस दुनिया के एक रिवाज़ ने मुझे हर बार हैरान किया है । और वह रिवाज़ है – रोते बिलखते या नाग की तरह फुफकारते ब्लोग्स की पॉपुलैरिटी, जनप्रियता या मक़बूलियत । इस तरह के ब्लोग्स एक बहुत बड़े हुजूम को अपनी तरफ खींचते हैं । अगर…