चरित्रहीन..२

दीपक, जितना प्यार मैं तुमसे करती हूँ, तुम उतना प्यार मुझसे क्यूँ नहीं कर सकते?’ कहते-कहते अपने आंसूओं में बहती एक कमजोर नाव सी सुधा दीपक की पत्थर जैसी मजबूत छाती पे टिक गयी ।

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चरित्रहीन

कभी रुक्मिणी को बताया कि तेरा हृदय जब-तब कालिंदीकूल के कदम्ब पर टिकी अपनी राधे के पास चला जाता है ? उस वेदना की अनुभूति तो ज़रूर होती होगी जो तुम दोनों के अस्तित्व का पर्याय बन गयी । कभी रुक्मिणी से बात करते-करते उसे राधे कहने की भूल हुई ?

एक चिट्ठी

प्यार हुआ तो जताना मुश्किल लगा, तड़पे तो तड़प छुपाना आसान लगा । तुम मिल गए तो लगा कि सिला मिल गया हर आँसू का । बिना मांगे तुम मिल गए अब क्या मरी भैंस की पूंछ फाड़ना ?

देखो रूठा ना करो

सुबह आँख खुली और बिस्तर पे उन्हें ना पाकर आलस तुरंत बिस्तर से कूद पड़ा और फिर अगले ही पल मुझे रात को हुई अनबन याद आ गयी । हुहं ! होंगे अपने कंप्यूटर पे । ऐसा सोचके मुहं बनाके हमने करवट बदली और नये सिरे से सोने की कोशिश की । मगर बाग़ी दिल में अलग…

Ever fascinating and ever captivating

I came across this mysterious divine character, who fearlessly did almost everything which is considered a taboo in a deity society and dealt with them in a surprisingly calm way. He is cool, outstanding, appealing and breaking all the stereotypes of being a God. Since childhood he is fascinating, captivating and mysterious for me. In…

My husband never cuddles me when I am sick.

It is heart wrenching to see your loved ones in bad health either physical or emotional or mental. I tend to hug and pay more loving attention to my kid, my hubby, my siblings and my parents when they are ill. So I expect each one of them to love me more and take great…