जय उज्जैन! जय महाकाल! जय दाल बाटी! -१

यहीं से घुमक्कड़ी यज्ञ में आहुतियाँ शुरू हो जाती हैं । पढ़ाई-लिखाई तो चलती ही रहती है, अब कॉलेज बंक करने की शुभ घड़ी आई है ।

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रैगिंग के वो दिन

यह मुखिया लोग जो बड़े सरकार के सामने ‘हम वो हैं, जो दो और दो पांच बना दें’ ऐसी डींगें हांक कर आये थे, उनका हमारी एक गलती ने फ़ालूदा बना दिया था । और इसके लिए हमे माफ़ी मिलना नामुमकिन था ।

मुजरिम हाज़िर हो

‘हाँ, जब तुम्हें पापा अच्छे लगे तो तुम इनका इंटरव्यू कर लेती । और पास होने पर शादी का डिसाइड करती वर्ना बस बॉयफ्रेंड बना लेती । किसी और का इंटरव्यू लेती और उससे शादी कर लेती ।‘

बचपन का किस्सा – प्रभु दर्शन

मेरा निष्पाप, निर्दोष, निर्विकार और अबोध मन साक्षी है कि मैं केवल गीत संगीत का रस लेने के उद्देश से गा रही थी । मुझे तनिक सा भी बोध न था कि प्रभु वाक़ई सीरियस हो जायेंगे और आनन-फानन दर्शन की योजना भी बना लेंगे ।

हँस भी दो

अथ श्री महाभारत कथा , हाँ-हाँ महाभारत कथा ।
मैं समय हूँ । सास बहू के बीच संवेदनशील वार्ता का साक्षी समय ।

हॉस्टल और कॉलेज वाला वैलेंटाइन डे

एक ज़माना ऐसा भी था जब कोई हमारा दिल और हम उसके दिल की धड़कन हुआ करते थे मगर सबको जताना भी था कि हम इन इश्क़ के लफ़ड़ो में नहीं पड़ते । क्या कूल हैं हम !

लेख की गगरिया और कमेंट्स की कंकड़िया – हाय ! फोड़ डाली !

आज के समय में आधुनिक माध्यम (सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) ने हर व्यक्ति को इतना सक्षम बना दिया है कि वो जब चाहे अपने विचार एक बहुत बड़े समूह में साझा कर सकता है । बहुत से लोगों के लिए कम शब्दों में अपनी बात कह पाना संभव नहीं होता तो वो तरह तरह…

ओके मम्मा, नाउ ट्यून चेंज..कायिला ग्लास

धनुष के कोलावेरी कोलावेरी डी गाने में तब मेरे लिए बहुत ही रोमांच आ जाता है जब “ओके मम्मा, नाउ ट्यून चेंज..कायिला ग्लास, ओनली इंग्लिश” वाली पंक्ति आती है | अहा !, मन किलकारियाँ मारते हुए, हिरनी की तरह कुलाँचे भरते समय में सोलह साल पीछे चला जाता है | आज से सोलह साल पहले…

फ़िर एक बार हम रेलवे स्टेशन पहुँच गए और……

आप सब भी जानते होंगे कि रेलवे स्टेशन में कहीं भी चाहे वो सीढ़ियाँ हो या प्लेटफार्म आप किसी से ज़रा सा हटने को कह दें तो एहसास होता है दुनिया में कितने लोग आँख और कान की समस्याओं से जूझ रहे हैं  । हालाँकि देखने में सब बिल्कुल दुरूस्त दिखाई देते है । सारे लोग…

चल छैय्याँ छैय्याँ छैय्याँ छैय्याँ चल छैय्याँ छैय्याँ छैय्याँ छैय्याँ -Hindi blog

कभी रिश्तदारों से मिलने, कभी क़ुदरत से रूबरू होने तो कभी घूमने फ़िरने वजह कोई भी हो भारतीय रेल का जिक्र आ ही जाता है । हर बार सफ़र में कुछ ऐसा ख़ास होता है जो यादों में हमेशा के लिए बस जाता है । कई बार रेल का सफ़र बहुत यादगार होता है और…