लुट गए….

हर एक एक वेबसाइट पे यह नज़र आयें

हजारों लाइक्स और कमेंट लेके इतरायें

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उलझने..बेसब्रियाँ

अगर यह एहसास इंसान के लिए इतने ज़रूरी ही हैं तो यह ऐसे ग़ैर-ज़रूरी क्यूँ लगते हैं ? डरावने क्यूँ लगते हैं ? किसके लिए अच्छी है हार ? किसको सुहाता है दुःख ?

बचपन का किस्सा – प्रभु दर्शन

मेरा निष्पाप, निर्दोष, निर्विकार और अबोध मन साक्षी है कि मैं केवल गीत संगीत का रस लेने के उद्देश से गा रही थी । मुझे तनिक सा भी बोध न था कि प्रभु वाक़ई सीरियस हो जायेंगे और आनन-फानन दर्शन की योजना भी बना लेंगे ।

उड़ान की तैयारी

आज तक बेटी पर मुझसे ज्यादा अधिकार किसी का न था लेकिन अब धीरे-धीरे पतंग को आसमान बुला रहा है ।

आज़ाद कश्मीर !!! कर दें ?????

यदि जम्मू-कश्मीर का इतिहास देखें तो पता चलता है कि इस राज्य ने आज़ादी के समय भारत और पाकिस्तान दोनों की ही प्रभुता मानने से इन्कार कर दिया था ।

एक चिट्ठी

प्यार हुआ तो जताना मुश्किल लगा, तड़पे तो तड़प छुपाना आसान लगा । तुम मिल गए तो लगा कि सिला मिल गया हर आँसू का । बिना मांगे तुम मिल गए अब क्या मरी भैंस की पूंछ फाड़ना ?

शिव के साथ वार्तालाप -२

तुम चुप क्यूँ हो ? कुछ तो कहो । कैसे मुस्कुराते पाते हो, शांत रह पाते हो ? क्या ताण्डव भूल चुके हो ?

ईमानदारी

ईमानदारी पसंद है मुझे

कहते थे हमसे..

ईमानदारी का एक किस्सा सुनाया

तो किनारा कर लिया हमसे..

मेरी बेटी के लिए

ना माँग अपना हक़, सखी बनके सवाली
ना बात बने शांति से तो हो जा बवाली….

इधर उधर की

कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है…
भाई क्या लिखें??
जो सोचो, हमसे पहले ही कोई लिख जाता है

कहीं दूर

शाख़ से यकायक फूल आ गिरे मेरे बालों में,

ज़रूर तुम खिलखिलाए होगे, कहीं, किसी बात पर…