लुट गए….

हर एक एक वेबसाइट पे यह नज़र आयें

हजारों लाइक्स और कमेंट लेके इतरायें

ईमानदारी

ईमानदारी पसंद है मुझे

कहते थे हमसे..

ईमानदारी का एक किस्सा सुनाया

तो किनारा कर लिया हमसे..

मेरी बेटी के लिए

ना माँग अपना हक़, सखी बनके सवाली
ना बात बने शांति से तो हो जा बवाली….

इधर उधर की

कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है…
भाई क्या लिखें??
जो सोचो, हमसे पहले ही कोई लिख जाता है

कहीं दूर

शाख़ से यकायक फूल आ गिरे मेरे बालों में,

ज़रूर तुम खिलखिलाए होगे, कहीं, किसी बात पर…

एसिड अटैक

मोहब्बत की हल्की सी आँच जो सह नहीं पाते
मोहब्बत के चहरे पे अंगार उड़ेल देते हैं…

पतझड़

न कर मुझसे हर हाल में साथ देने का वादा मेरे दोस्त,
मैंने पतझड़ में दरख्तों को पत्तों के बिना देखा है…..