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ज़रूरत है ज़रूरत है ज़रूरत है

इक आसरे की जो

एक सृष्टि दो दृष्टि

क्यूँ पुष्प वृथा तू रोता है 
अपने जीवन-रस को खोता है

यह कैसा संशय !

है अगर लक्ष्य महत्त्वपूर्ण तो 
क्या साधन का मोल नहीं होता ?

कैसी ज़िद्द

कीमत में यह दर्द और ज़हर है तो
हर रोज़, हर पल पीना है मुझे
फिर क्यूँ भुला दूँ तुझे?

लुट गए….

हर एक एक वेबसाइट पे यह नज़र आयें

हजारों लाइक्स और कमेंट लेके इतरायें

ईमानदारी

ईमानदारी पसंद है मुझे

कहते थे हमसे..

ईमानदारी का एक किस्सा सुनाया

तो किनारा कर लिया हमसे..

मेरी बेटी के लिए

ना माँग अपना हक़, सखी बनके सवाली
ना बात बने शांति से तो हो जा बवाली….