ताक़त की दुनिया

पता है कुछ लोग अपने जीवन की जिम्मेदारी नहीं उठा सकते हैं- न जीने की और न मरने की । उन्हें जीने के लिए दूसरों का सहारा चाहिए होता है और अपनी खुदखुशी का इल्ज़ाम भी वो दूसरों पर थोप जाते हैं । तू उन लोगों में से है ।

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सेक्स को सेक्स ही रहने दो…

यदि प्रकृति ने किसी भी प्रजाति को सेक्स ज्ञान न दिया होता तो यह सृष्टि आगे ही न बढ़ी होती लेकिन प्रकृति ने मनुष्य के अतिरिक्त सभी प्रजातियों के लिए सेक्स और प्रजनन का साल में एक समय अन्तराल निर्धारित किया है ।

A Stick, a Zero and a Hero

This is the first memory of my academic life. I was in second grade when I got ZERO marks in mathematics test.