द्रौपदी : अग्नि-स्वरुपा

क्या द्रौपदी अपने पुत्रों की जीवनधारा और भाग्यरेखा बदल सकती थी ? यह चिरस्थायी द्वन्द है । नारी स्वयं के लिए जीवन जिए या अपने नातों के लिए ?

माँ सरस्वती, प्लीज़ अपने कमल से मत उठिए

कभी-कभी माँ सरस्वती अपने कमल को छोड़कर जिह्वा पर आ विराजती हैं, ऐसा मत हमारी संस्कृति में प्रचलित है । इसी मत के तहत बुरी बातें कहने को अक्सर मना किया जाता है ।

मैं हूँ ना, माँ

इतनी स्वार्थी….इतनी बीमार हो गयी मैं? मेरी बेटी स्कूल जाकर भी इस ख़याल से छूट नहीं पायी कि माँ ने उससे कहा ,’ तुम्हें पता है माँ बीमार है फिर भी तंग करती हो’ । बालमन पर यह कैसा बोझ रख दिया मैंने अनजाने में ?

मुजरिम हाज़िर हो

‘हाँ, जब तुम्हें पापा अच्छे लगे तो तुम इनका इंटरव्यू कर लेती । और पास होने पर शादी का डिसाइड करती वर्ना बस बॉयफ्रेंड बना लेती । किसी और का इंटरव्यू लेती और उससे शादी कर लेती ।‘

शिव के साथ वार्तालाप -२

तुम चुप क्यूँ हो ? कुछ तो कहो । कैसे मुस्कुराते पाते हो, शांत रह पाते हो ? क्या ताण्डव भूल चुके हो ?

Cultivating reading habit

There are many little ways to enlarge your child’s world. Love of books is the best of all. –Jacqueline Kennedy Onassis

पेरेंटिंग ज्ञान

अक्सर पढ़ने में आता है कि माँ-पापा बच्चे के आदर्श होते हैं । बच्चे उनके आचरण से सीखते हैं ना कि उनके मुहँ से निकले ज्ञान वचनों से । मैं एक छः वर्षीया कन्या की माँ हूँ और अपने अनुभव से आपको सचेत करना चाहती हूँ कि इन बातों में कदापि ना आयें ।

चिया और सिनेमाघर

कल एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण दिन था, हमारे घर के लिए | मेरी छः वर्षीया बेटी को सिनेमाघर में फ़िल्में देखने का कोई शौक नहीं बल्कि अगर यह कहूँ कि उसे ऐसा करना सख्त नापसंद है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी | जब मेरी बेटी छोटी थी तो तेज़ आवाज़, घने अँधेरे में इतने बड़े…