कर्ण पक्ष लेना है या पार्थ बन जाना है

केवल जीत मायने नहीं रखती
लेकिन
खुद से खुद की संधि मायने रखती है

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निष्प्राण शब्द

यह सब क्या हो गया ! कहाँ गया सब कुछ ? किसने हैक कर लिया मेरा सॉफ्टवेयर ? क्या वायरस है यह ? गीत बढ़ता जा रहा है

यह कैसा संशय !

है अगर लक्ष्य महत्त्वपूर्ण तो 
क्या साधन का मोल नहीं होता ?

कोई देखे

क्षण भर में अनगिनत उतार-चढ़ाव पर सधते सुर जैसे उसके दिमागी असंतुलन का रूपक हैं, जो उमींद और मायूसी में लड़खड़ा रहा है । नायिका इस समय अन्दर ही अन्दर बिखर रही है,

यह मेरा दीवानापन है

क्या धमकी है ! क्या बदलाखोरी है ! क्या इरादा है ! क्या रोमांस है ! क्या दर्द है ! क्या जूनून है ! क्या वहशत है ! क्या दहशत है !

माँ सरस्वती, प्लीज़ अपने कमल से मत उठिए

कभी-कभी माँ सरस्वती अपने कमल को छोड़कर जिह्वा पर आ विराजती हैं, ऐसा मत हमारी संस्कृति में प्रचलित है । इसी मत के तहत बुरी बातें कहने को अक्सर मना किया जाता है ।