दिल ने दिल से क्या कहा

आठवीं कक्षा की एक छात्रा अपनी सायकिल पर सवार लखनऊ शहर की सडकों से गुज़रते हुए अपने स्कूल को जा रही है..तभी पीछे से एक बहुत ही सधे स्वर और मधुर से गीत के बोल उसके कानों में पड़ते हैं….

“दिल ने दिल से क्या कहा, सुन ज़रा सुन ज़रा

दे रहा है क्या सदा, सुन ज़रा सुन ज़रा

मौसम बहारों का…. आ रे आ, आ रे आ”

छात्रा की सायकिल चलाने की रफ़्तार कम हो गयी और वो उस संगीतमयी सायकिल के पास सी हो गयी.. इस उम्र तक आते-आते मनचलों और उनकी छेड़छाड़ के काफ़ी अनुभव लड़की को हो चुके हैं.. कई बार तो कुछ अनजान, भले से लड़के उसे स्कूल से घर तक और घर की अगली गली से स्कूल तक छोड़ने का काम बखूबी कर चुके हैं.. वो कभी-कभी ही सामने आते हैं अक्सर तो उनकी सूरत भी नहीं देख पाती थी वो लड़की..वो भले से लड़के सायकिल के पीछे-पीछे ही कुछ न कुछ बतियाते हुए चलते थे… इस लड़की को सायकिल चलाते हुए बात करने का कॉन्फिडेंस नहीं आता था तो वो जवाब नहीं देती थी, पर सुनती सब थी… कभी किसी की आवाज़ बड़ी अच्छी सी लगती थी, ऐसे जैसे सागर में लहरें उफ़न रही हों… कभी किसी की बातें क्यूट सी लगती थी.. कभी-कभी अंदाज़-ए-बयां डराता था.. कभी किसी का बेसुरा गाना सुनने पर मन होता था रास्ता जल्दी से कट जाए और कान बचें.. लेकिन आजतक उसने कभी किसी लड़के को पलटकर देखा नहीं था..शायद सायकिल चलाते हुए ऐसा करने का कॉन्फिडेंस भी न रहा हो उसमें…

लेकिन, आज की बात और है..आज तो उसे कॉन्फिडेंस जुटाना पड़ेगा..एक बार तो उसे देखना है कि यह लड़का कौन है.. वैसे इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि वो कौन है क्यूँकि सब माया है..आज वो मेरे पीछे है कल किसी दूसरी के पीछे होगा और कोई तीसरा मेरे पीछे… पर फिर भी, उस लड़की की सायकिल धीमी हो गयी और अंदाज़े से उसने एक छोटी सी दूरी दोनों सायकिलों के बीच बनाई और उस मीठी आवाज़ में डूबती सी रास्ता तय करती रही.. रफ़्तार नहीं बढ़ाई कि कहीं उस लड़के का तेज़ रफ़्तार में गाने की कोशिश में सुर न ख़राब हो जाए… दूरी नहीं बढाई कि कहीं कोई नीचा सुर लड़की के कानों से बच न जाए.. दिल किया बस यूँही सब ऐसे ही चलता रहे.. वो गाता रहे, बस, गाता रहे, लड़की सुनती रहे, सुनती रहे और सायकिल चलती रहे.. पर जनाब, सब कुछ चाहा हुआ ही हो जाए तो क्या कहने…

न चाहते हुए भी लड़की का स्कूल आ गया… आज न जाने कैसे धीमी सायकिल चलाने के बाद भी स्कूल जल्दी आ गया… और लड़की को सायकिल का हैंडल न चाहते हुए भी मोड़ना पड़ा.. और आज उसने अपने कॉन्फिडेंस से पूछा , “हो ना? पलट लूँ, एक बार” और उसने चलती सायकिल से सर पीछे घुमाकर देखा उस अनजान, भले से कलाकार को.. उम्मींद तो नहीं थी पर कलाकार तो फिर कलाकार है…उसने मुस्कुराकर आँख मार दी… लड़की को हंसी और गुस्सा एक साथ आया.. पर घड़ी भर बाद ही उसने मन ही मन लड़के को दुआ दी, “ऐसे ही गाते रहो और थोड़ा सुधर जाओ’ मुस्कुराती हुई वो स्कूल में दाखिल हो गयी..

वापसी में स्कूल से बाहर आते ही उसकी नज़रें और कान किसी को ढूँढ रहे थे.. यह जानते हुए भी कि सब माया है.. वो धीमे-धीमे अपनी सायकिल खींचती हुई जा रही थी कि रास्ते में एक दूकान पर नज़र पड़ी… उसने सायकिल रोकी और दुकान में दाख़िल होते ही पूछा, “अंकल, यह गाना किस फिल्म का है.. ‘दिल ने दिल से क्या कहा’ ?” अंकल बोले, “आईना, कैसेट आ गयी है” और झटपट कैसेट निकालकर सामने रख दिया.. यह पहली बार है जब उस लड़की में अपनी मंथली पॉकेट मनी से ‘विज्ञान प्रगति’ नहीं बल्कि एक कैसेट खरीदा- आईना… अब सायकिल सरपट भाग रही थी, घर पहुँचने की जल्दी थी.. घर पहुँचते ही कैसेट फ़िलिप्स के टू-इन-वन में लगा और लड़की खुश हो गयी… उस दिन न जाने कितनी बार यही गाना सुना और गाया…” दिल ने दिल से क्या कहा, सुन ज़रा सुन ज़रा”

ज़िंदगी के यादगार दिनों में से एक दिन है यह… जो जब याद आता है, मुस्कराहट लाता है..

image credit : https://boomphilly.com/3691083/is-tinashe-stalking-ben-simmons-kendall-jenner/

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