ताक़त की दुनिया

भाग १

हिना तेज़ कदमों से मेट्रो में चढ़ी और एक सीट खाली पाकर वहाँ बैठ गयी । उसका स्टॉप लगभग ३० मिनट दूर था । आज हिना आसपास महिलाओं के कपड़े, सेंडल और हेयर स्टाइल पर ध्यान नहीं दे रही है । एक अजीब बैचैनी की गिरफ़्त में है, हर चेहरे को धकेलकर एक चेहरा हर तरफ से उसे घूर रहा है । यह चेहरा शशि का है जिसमें हिना ख़ुशी, दुःख, आँसू, दर्द, गुस्सा और ऐसे ही कई रंग भरने की कोशिश कर रही है । लेकिन शशि का सपाट और उदासीन शांति से सफेद चेहरा हर रंग को ठुकरा रहा है । एक अडिग धैर्य जो शशि की आँखों में टिका हुआ है वो हिना को डरा रहा है । उस चेहरे से बचने के लिए हिना के हाथ अपने पर्स को कसकर जकड़ रहे हैं और उसने आँखें भी कसकर बंद कर ली हैं । लेकिन एक ज़ोरदार तमाचे की गूँज से घबराकर हिना का पूरा शरीर ढीला पड़ गया और आँखें खुल गयी । सामने कुछ नहीं बदला, अब भी शशि उसे एकटक देख रही है अपने सपाट चेहरे के साथ । हिना ने एक गहरी सांस छोड़ते हुए आँखें फिर से मूँद ली । बंद आँखों के पीछे पूरा रंगमंच सजा हुआ है, जिसपर आज फिर से २० साल पुराना नाटक चल रहा है । इन २० सालों में न जाने कितनी बार हिना ने इस नाटक को देखा है और जिया है । वो बार-बार क्यूँ भटकती है वहाँ ? शायद नाटक का अंत बदलना चाहती है या पूरा नाटक ही ।

२० साल पहले प्रभास ने सारे दोस्तों को एक पांच सितारा होटल में एक शानदार पार्टी के लिए बुलाया था । प्रभास विदेश से हाईयर एजुकेशन लेना चाहता था और यह पार्टी उसको हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से बुलावा आने की ख़ुशी में थी । सभी दोस्त खुश थे लेकिन शशि की ख़ुशी का तो कोई आर-पार ही नहीं था । वो तो शायद प्रभास से भी ज्यादा खुश थी और हो भी क्यूँ न ? प्रभास उसका प्रेमी और मंगेतर था । सारे दोस्त एकसाथ गाड़ी से होटल पहुँचे । सबके गाड़ी से उतरने के बाद प्रभास ने शशि को होटल में बुकिंग चेक करने का इशारा किया और खुद गाड़ी पार्क करने चला गया । सारे दोस्त रिसेप्शन का मुआयना करते हुए हल्की-फ़ुल्की बातों में लग गए और शशि रिसेप्शन के बुकिंग रजिस्टर में प्रभास का नाम ढूँढने लगी । प्रभास को समय लग रहा था और इधर शशि भी कुछ असहज सी लग रही थी । हिना शशि के पास गयी और दोनों मिलकर प्रभास का नाम ढूँढने लगीं मगर नाकाम रहीं । इतने में प्रभास आ गया था । उसने सवालिया नज़रों से शशि की तरफ देखा तो शशि ने कहा ‘ तुम्हारे नाम से कोई बुकिंग नहीं है ‘। प्रभास का चेहरा थोड़ा तन गया और शशि को एक नज़र घूरने के बाद उसने रजिस्टर में अपना सर घुसेड़ लिया । पल भर में तमतमाया हुआ प्रभास शशि को घूरता हुआ बोला ‘अंधी कहीं की , बेवकूफ़ मेरा नाम ढूंढ रही थी और ढूँढना था ट्रेवल एजेंसी का ‘ । शशि ने आँखें चुराते हुए कहा ‘मैं भूल गयी थी’ । इतना सुनते ही प्रभास का हाथ हवा में तेज़ी से लहराया और एक झन्नाटेदार तमाचा बनकर शशि के गालों पर थम गया । सारे दोस्त जड़ हो गए, ऐसा लगा पूरी दुनिया को किसी ने स्टेचू बोल दिया हो । सब सारी हिम्मत से खुद को संभाल रहे थे, किसी में शशि के चेहरे की तरफ देखने की हिम्मत नहीं बची । हिना को अपने पूरे शरीर में एक कपकपी, एक झुरझुराहट का एहसास होने लगा । ऐसा लगा उसके घुटनों ने उसका भार उठाने से मना कर दिया है और वो धम्म से रिसेप्शन के सोफे में धंस गयी । तभी एक कुहनी हिना को छू गयी और वो २० साल बाद की दुनिया में लौट आई । यह उसकी शशि से आख़िरी मुलाक़ात थी ।

उस हादसे के ३ महीने बाद प्रभास और शशि की शादी थी । हिना ने उस हादसे के बाद शशि को एक बार फ़ोन किया था । उसने शशि को समझाने की कोशिश भी थी कि प्रभास उसके लिए सही लड़का नहीं है । जो लड़का सरेआम उसका आत्मसम्मान चीरकर उसे नंगा कर दे, वो लड़का सही नहीं है । जो लड़का उसकी गरिमा को तार-तार उधेड़ दे, वो लड़का सही नहीं है । लेकिन ज़वाब में शशि की बातों ने हिना के मन को शशि के लिए मैला कर दिया । हिना को शशि की बातें सुनकर उल्टी करने का मन हो आया और कुछ तो उसने फ़ोन पर कर भी दी, शशि के कानो में । शशि ने कहा ‘ हिना, मैंने अपने घर वालों को बहुत मुश्किल से इस शादी के लिए मनाया है । कितने जतन करके उन्हें यकीन दिलाया कि मैं और प्रभास एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं । अगर उन्होंने मेरी शादी प्रभास के सिवा किसी और से कराने की सोची भी तो मैं आत्महत्या कर लूंगी । अब जब मेरे माँ-पापा इस रिश्ते के लिए तैयार हो गए हैं तो मैं पीछे कैसे हट सकती हूँ ? सबको पता चल गया है और अब कोई फायदा नहीं । मेरे माँ-पापा की बहुत बदनामी होगी और मैं खुद भी अपने घरवालों की नज़र में जिंदगीभर एक मज़ाक बन जाऊँगी । और हिना तू इतनी चिंता मत कर । प्रभास गुस्सेल है, लेकिन मुझसे बहुत प्यार करता है । अगर वो मेरे बिना जी सकता तो प्रोपोज़ ही क्यूँ करता ? सोच जाने से पहले शादी करके जाना चाहता है । पता है, उस दिन के लिए उसने कितनी बार माफ़ी मांगी और मेरे सामने रोया भी । मैंने उसे माफ़ कर दिया ।‘ शशि बोलती जा रही थी और उसके शब्द एक तेज़ ब्लेड की तरह हिना के शरीर को छीलते जा रहे थे । ऐसा लग रहा था हिना के शरीर से उसकी खाल छील-छील कर अलग कर रहे थे शशि के ख़याल, शशि का डर और शशि का अपनी बलि देने का इरादा । जब उससे बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने फ़ोन पर शशि को कहा ‘तू कायर है, डरपोक है, सच में अव्वल दर्जे की बेवकूफ है । पता है कुछ लोग अपने जीवन की जिम्मेदारी नहीं उठा सकते हैं- न जीने की और न मरने की । उन्हें जीने के लिए दूसरों का सहारा चाहिए होता है और अपनी खुदखुशी का इल्ज़ाम भी वो दूसरों पर थोप जाते हैं । तू उन लोगों में से है । तुझे अपनी बलि देनी है दे, मैं उस बलिदान समारोह में नहीं आऊँगी । और तुझ जैसी कमज़ोर लड़की से मुझे घिन हो रही है इसलिए आज के बाद कभी मैं तुझे फ़ोन भी नहीं करूँगी ।‘ और हिना ने दर्द से बिलखते हुए फ़ोन पटक दिया । कैसी बेबसी थी ! उसे पता था जो हो रहा है वो गलत है लेकिन वो कुछ नहीं कर सकती । जब शशि ख़ुद को मिटाने का फ़ैसला कर चुकी है तो हिना कर भी क्या सकती है । उस फ़ोन के बाद शशि और हिना के रास्ते अलग हो गए । पिछले हफ्ते फेसबुक पर हिना ने शशि को पाया और आज पूरे २० साल बाद वो उससे मिलने जा रही है ।

अंतिम भाग : ताक़त की दुनिया….२

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