गिर गया झुमका …गिरने दो

भाग १

धीरे-धीरे कब मालती को दीपक की बातों की लत लग गयी किसी को पता ही नहीं चला । मालती कभी दीपक से मिली नहीं थी । दीपक का काम ऐसा था कि सोशल होना उसकी पसंद और मजबूरी दोनों था । मालती गिने चुने लोगों में खुश थी, सोशल होना न उसकी पसंद था और न मजबूरी । एक दिन दोनों की मुलाक़ात सोशल मीडिया पर हुई और हमेशा दोनों वहीं एक दूसरे से बात करते थे । एक दूसरे की बातों पर हँसना, एक दूसरे को कुछ नयी बातें बताना, कभी अपने परिवार के बारे में बात करना, कभी कोई नयी किताब पढ़ी तो उसकी कहानी में क्या अच्छा-बुरा लगा और कौन सा करैक्टर सबसे पसंद आया, कभी अपने बचपन की कोई याद बांटना और भी न जाने कितनी ही बातें थी जो वो दोनों किया करते थे । समय के साथ उन दोनों की दोस्ती गहरी होने लगी । दोनों को एक दूसरे से बात करना बहुत पसंद था । शायद ही कोई दिन होता हो जब वो दोनों बात न करते हों । और जिस दिन ऐसा होता था मालती को एक बेचैनी सी महसूस होती और एक इंतज़ार बार-बार उसे उसका मोबाइल चेक करने को मजबूर कर देता था ।

एक बार मालती को किसी काम से कहीं बाहर जाना पड़ा और वहाँ इंटरनेट की सुविधा नहीं थी । मालती ने दीपक को बता दिया था कि वो अगले १० दिनों तक दीपक से बात नहीं कर पायेगी । दीपक ने उसे खूब मस्ती करने और घूमने की राय दी । नयी जगह थी, नया काम था और मन में यह तसल्ली भी थी कि बस १० दिन की बात है, मालती ने उन १० दिनों में खूब मजे किये और सोचा लौटकर दीपक को बताएगी यह सब । मालती ने सोचा था कि दीपक उसके लौटते ही उससे बात करेगा । मालती को लौटे २ दिन हो गए थे और दीपक ने कोई बात नहीं की । मालती ने भी पहल नहीं की हालाँकि उसे थोड़ा दुःख हुआ कि दीपक ने उसकी गैरमौजूदगी महसूस नहीं की । लेकिन फिर सोचा, शायद दीपक कहीं बिज़ी होगा, चलो, मैं ही पहल कर लेती हूँ ।

मालती का मेसेज पाते ही दीपक ने पूछा, “कब लौटी” और जवाब सुनते ही गुस्सा हो गया, “बताया क्यूँ नहीं” । मालती ने कहा- जाने से पहले तो बताया था । दीपक ने कहा कि वो भूल गया था । थोड़े मनमुटाव और थोड़े मानमुन्व्वल के बाद दोनों फिर से सामान्य ढंग से बातें करने लगे । दोनों को एक दूसरे से बातें करना इतना पसंद था कि दोस्ती के दायरे में इतनी भूल-चूक की गुंजाईश और रियायत दोनों तरफ से थी । गहरी दोस्ती और प्यार, दोनों में ही इंसान एकदम बच्चे जैसा पवित्र होता है, जो मन में हो वही जुबान पर होता है । लेकिन कई लोग इस पूर्वाग्रह से ग्रसित होते हैं कि एक लड़का और एक लड़की कभी अच्छे दोस्त नहीं हो सकते, उनकी दोस्ती का अंजाम प्यार ही होता है । ऐसे लोग अगर मालती और दीपक के मेसेज देखें तो शायद वो उनकी दोस्ती को प्यार का ही नाम देंगे । मालती का कहना था ‘जिसे जो सोचना हो सोचे, किसी के कुछ सोचने से मुझे फ़र्क नहीं पड़ता’ । मालती अपने परिवार और ख़ास दोस्तों के सिवाय किसी की बात को कान नहीं देती थी । दीपक भी ऐसा ही था । उनके एक जैसे फ़लसफ़े ही उनकी दोस्ती की शुरुवात और दोस्ती के सफ़र के ज़िम्मेदार थे ।

एक दिन दीपक की बातों से मालती को लगा कि दीपक की पत्नी को उन दोनों की दोस्ती से परेशानी है । मालती को दीपक के अंदाज़ से लगा कि दीपक संभाल लेगा । दीपक ने बातचीत कम कर दी तो भी मालती को लगा कि दीपक समय ले रहा है सब ठीक करने के लिए । मालती का इंतज़ार पूरा हुआ और दीपक से फ़िर से बात शुरू हुई । लेकिन अब बातें इतनी बेबाकी से नहीं हो पाती थी, कुछ था जो उन दोनों की दोस्ती के दरमियाँ पसर रहा था । शायद वो कुछ था दीपक की पत्नी की असहजता । परिवार अगर दोस्त को बर्दाश्त नहीं कर पाता है तो वो बहुत मुश्किल घड़ी होती है । यक़ीनन केवल एक टीनेजर ही परिवार से दोस्त के लिए लड़ेगा बाकि सभी के लिए अपनो से लड़ना बहुत मुश्किल होता है । एक पत्नी के लिए अपने पति को बंटते देखना भी कतई नागवार होता है । कई पत्नियां तो पति के परिवार वालों को भी इसी वजह से नापसंद करती हैं तो एक दोस्त की क्या बिसात ? धीरे-धीरे फ़ासले बढ़ते गए और आख़िरकार दीपक और मालती अलग हो गए ।

कितने पास था उसके और कितना अपना सा था दीपक यही सोचते-सोचते मालती का हाथ उसके कानों तक पहुँच गया और उसे एहसास हुआ कि दीपक को उसने झुमके की तरह कानों में पहन रखा था । झुमके की रुनझुन में दीपक की बातों की मिठास थी । अब सूने कान रुनझुन को तरस रहे हैं क्यूंकि झुमका कहीं गिर गया ।

मालती इतनी जल्दी उस दुःख को महसूस करने से मुकर रही थी या उसे ठीक से अंदाज़ा लग नहीं पाया था अपने नुक्सान का । खुद को धोखा देते हुए खुद से बोली, ज़िन्दगी रुकती नहीं है किसी के होने या न होने से और एक लड़की के कान खाली अच्छे नहीं लगते । अपने नुक्सान की भरपाई करने मुस्कुराती हुई मालती बढ़ चली नए लेटेस्ट फैशन वाले झुमके की आस में और गाती जा रही थी ‘गिर गया झुमका …गिरने दो, चुभ गया कांटा…. चुभने दो’

दूसरा भाग : गिर गया झुमका, गिरने दो…२

image credit : jhumka

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