होली है!!!

 

होरी खेरे रघुवीरा अवध में

होरी खेरे रघुवीरा

आज मेरे माँ पापा के घर में होली का कार्यक्रम है जिसमें हम लोग एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाते हैं । कुछ देर चाय, सौंफ, लौंग के साथ गीत संगीत का दौर चलता है और फ़िर ठंडई या भांग की चटनी के साथ सूखे मसालेदार आलू का स्वाद । कुछ लोग भांग के लड्डू भी खिलाते हैं । हंसी मज़ाक का ऐसा माहौल बनता है कि तुरंत ही कोई न कोई कह उठता है ‘कल मेरे यहाँ होली है’ । और सिलसिला चलता रहता है मोहल्ले में आज मेरे घर, कल तेरे घर और परसों किसी और के घर । होली के दिन हमारे पापा और मोहल्ले के बाकी अंकल ढोलक लेकर निकलते हैं । एक सिरे से मौहल्ले में सबके घर जाना शुरू करते हैं, हर एक के यहाँ कम से कम एक गीत गाकर, गुझिया खाकर और अगर कोई चाहता हो तो दारू का एक पेग लेकर अगले घर की ओर रवानगी । एक गीत जो बहुत ही लोकप्रिय है-

जल कैसे भरूँ जमुना गहरी

ठाड़े भरूँ राजा राम देखत हैं

बैठे भरूँ चुनरी भीगे

जल कैसे भरूँ जमुना गहरी

यह गाना मेरे पापा बहुत ही अच्छा गाते हैं और शायद इसीलिए यह मेरा फेवरेट भी है । एक बार मैंने पापा से पूछा कि यह होली के गानों में राम का जिक्र क्यूँ होता है, राम तो बहुत गम्भीर किस्म के व्यक्तित्व की तरह चित्रित किये जाते हैं । पापा ने कहा, कभी कभी विचित्र चित्र का भी मज़ा लेना चाहिए और गम्भीर लोगों को भी होली में चुलबुला हो जाना चाहिए ।

पापा लोग जब राउंड पर होते हैं तो मौहल्ले के किशोर, नए नए teenagers, गुलाल और रंग के पाउचों के साथ निकलते हैं । लेकिन पापा लोग जिस घर में हो वहाँ नहीं, किसी दूसरे घर में जाते हैं । इस किशोर गुट में से जिसकी घर में ज्यादा पहुँच हो वो आगवानी करता है और ‘आंटी जी’ की आवाज़ लगाता है । आंटी जी आई, तो लीडर युवक बहुत शालीनता से अबीर माथे पे लगाकर चरणस्पर्श करके ‘होली मुबारक हो’ कहता है । यह एक तरह है पास होता है जो गुट के शरारती युवक को भी घर में बुलाने के काम आता है । फ़िर तो भाई, कुछ shy क़िस्म के युवक जो घर के बाहर ही रुक गए हैं, उनकी तरफ दोस्ती निभाने का सुन्दर समय मिलता है इस शरारती युवक को । वो प्लेट से गुझिया निकाल निकालकर बॉल की तरह उन शर्मीले युवकों की तरफ फेंकना शुरू करता है । काबिले तारीफ़ यह है कि कोई catch नहीं छूटता, सारी गुझिया पेट में ही जाती हैं । मम्मी लोग तो वात्सल्य के कारण बस मुस्कुराकर नज़रंदाज़ कर देती हैं, लेकिन वो बच्चे चिढ़ जाते हैं जिन्होंने पिछली रात बैठकर मेहनत से गुझिया बनवायी थी । शरारती लड़का जब यह देखता है तो गुलाल लिए बच्चे के पास जाता है और उसके चेहरे को रंगते हुए कहता है ‘बुरा न मनो होली है’ । कुछ बात है इस बात में कि बच्चा मुस्कुरा देता है और जवाबी रंग युवक के चहरे पर लगा देता है ।

अच्छा अगर उस घर में एक teenager लड़की भी हो तो नज़ारा ही बदल जाता है । उसके माथे से ज्यादा गुलाल उसकी मांग और बालों में पड़ा होता है । जिनके दिल साफ़ होते हैं, वो युवक सहजता से आते हैं और माथे पे छोटा सा टीका लगाकर ‘हैप्पी होली’ कहते हैं । एक वही सूटेबल कैंडिडेट दिखती है लड़कों को, इंग्लिश में विश करने के लिए । जो थोड़े शर्मीले होते हैं वो बहुत ऐतियात से पहले से लगे टीके के ऊपर बस अपनी चुटकी छुवाकर विश कर देते हैं । जो शैतान होते हैं वो मुट्ठी भर गुलाल लेकर माथे और गालों को सहलाते हुए विश करते हैं । अब बारी आती है उनकी जिनके दिल में चोर होता है, वो एक तो पहले ही कुछ घबराये से होते हैं उस पर आंटी भी सामने हैं । किसी तरह जान पे खेलकर वो थोड़ा गुलाल माथे पे लगाते हैं और फ़िर कब बाकी का गुलाल लड़की के सर पर उड़ेल देते हैं शायद उन्हें भी पता नहीं चलता होगा । उसके बाद अपनी मुस्कुराहट को छुपाते हुए सर झुकाकर ‘हैप्पी होली’ कह देते हैं । लड़की अपने बाल झटकते हुए बिना उसे विश किये अन्दर चली जाती है । उसे भी लड़का पसंद हो तो भीतर जाके जी भर खुद को शीशे में देखकर मुस्कुराती है वरना भुन भुन करती हुई गुलाल से पीछा छुड़ाने में लग जाती है ।

सबसे ज्यादा उत्साहित होते हैं बच्चे, सुबह से पुराने कपड़े पहनकर, बालों में तेल चुपड़कर तैय्यार । इन्हें रंगीन पानी की भी दरकार नहीं होती । अपनी नन्ही पिचकारियों में सादा पानी भरकर ही एक दो राउंड हो जाते हैं इनके, भीगने भीगाने के । ओहो! बहुत चुनौतीपूर्ण होता है नाश्ते तक इन्हें घर पर रोकना । छोटे छोटे शावक की तरह पूरे मौहल्ले में कुलाँचे भरते हैं यह बच्चे । किसी के भी ऊपर पिचकारी चला दी । हाँ मगर जो लोग बहुत ज्यादा रंगे हुए हों और जुझारू भी, जो इनके बच्चे होने का लिहाज न करें, उनसे थोड़ा बचकर रहते हैं । अपने दोस्तों के यहाँ जाकर गुझिया, पापड़ का मज़ा लेते हैं चाहे घर से कितना भी समझाकर भेजो ‘लालू, ज्यादा मत खाना, पेट गड़बड़ हो जायेगा’ । बीच बीच में घर आते हैं और पिचकारी लेके ऐसे छत पर तैनात होते हैं जैसे दुश्मन के इंतज़ार में किले पे तोपें या बंदूकधारी तैनात होते हैं । अब जैसे ही कोई गली से गुज़ारा, इनकी पिचकारी शुरू । भीगने वाला भी मुस्कुराकर इनकी हौसलाअफजाई कर जाता है । अभी घर पर थे अभी गायब ।

घर में बहुत कुछ घटित हो चुका होता है जब तक पापा अपने फेरे से लौट आते हैं । अब मम्मी लोग निकलती हैं और साथ में हम लड़कियाँ भी । मम्मी लोग पहले ही पिछले १४ दिनों में काफी गायन वादन कर चुकी होती हैं, तो उस दिन लाइमलाइट पापा लोगों को दे दी जाती है । सब एक दूसरे को रंग मलकर घर लौट आती हैं । नहाने धोने की तैय्यारी शुरू हो जाती है और ठीक तभी मौहल्ले के नटखट चाचा लोग आते हैं । इन चाचा लोगो को उस दिन पूरी छूट होती है रेलिंग से कूद कर आओ, बरामदे की दीवारों पर रंगीन हाथ छापते हुए आओ, छत ज्यादा ऊँची न हो तो वहीँ से कूद कर आँगन में भाभी लोगो को रंग डालो और रंग भी खतरनाक काले, बैगनी और सिल्वर ! हम बच्चे पुरजोर कोशिश करते हैं कि चाचा मम्मी को पकड़ न पायें । और चाचा लोग को भिगाने का इंतज़ाम भी होता है, बाल्टी भर रंगीन पानी । कभी कभी कामियाब हो जाते हैं मगर अक्सर वो पानी हमारे ही ऊपर डाल दिया जाता है । बल और छीना झपटी में पुरुष को मात देना अभी भी थोड़ा मुश्किल है । कुछ चाचा तो जैसे मन बनाकर ही घर से निकलते हैं कि आओ हमे भिगाओ, तो वो कोई प्रतिरोध नहीं करते और नतमस्तक होकर बाल्टी के नीचे खड़े हो जाते हैं । फ़िर अपने गीले कपड़ों में ही बरामदे में पड़े तखत पर बैठकर गुझिया खाते हैं, इत्मीनान से । वो अपनी ही किसी दुनिया में मस्त होते हैं ।

सबको अपनी मस्ती के रंग में रंगकर, बेहद खूबसूरत यादें देकर होली अगले बरस फ़िर आने को चली जाती है । मैं उत्तराखंडी हूँ और यह वहाँ का तरीका है होली मनाने का । पूरे १५ दिन चलता है यह रंगों और उत्सव का सिलसिला । यह कुछ यादें हैं होली की जो मैंने बचपन और टीनएज में खेली और देखी है । अब सब कुछ बदल गया है, मैं लखनऊ से निकलकर महानगर में आ गयी, छोटे घर से निकलकर फ्लैट में आ पहुँची और मौहल्ला सोसाइटी में तब्दील हो गया । इस सोसाइटी में होली के रंग कैसे होते हैं यह अगले लेख में लिखूंगी, कुछ देर तो अपने बचपन में जी लूँ ।

आप सभी को होली की शुभकामनाएं ।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s