मेरे राज और सिमरन

तुमसे बढ़के दुनिया में ना देखा कोई और जुबान पर आज दिल की बात आ गयी ।

अगर कोई आशिक़ यह गीतअपनी महबूबा को  नज़र कर दे तो उस महबूबा की ख़ुशी, नाज़ और शर्म का कोई किनारा आपको ढूंढें नहीं मिलेगा । महबूबा को यह गीत दुनिया में अपने सबसे बेहतरीन होने का एहसास देता है ‘ आई ऍम द बेस्ट ‘ और इस ख़ुशी में उसका दिल , उसकी दुनिया झूम उठती है । अपने आशिक़ की पारखी नज़रों का कायल और घायल दिल आशिक़ के पहलू में पनाह ले बैठता है ।

एक बार मुझे मौका मिला, ऐसा भीना-भीना नज़ारा देखने का । जब मैं राज के जन्मदिन की पार्टी पे सिमरन से मिली । आशिक़ का हवा जैसा हल्का होकर उड़ना और महबूबा की शर्म से झुकी नज़रें, अपने आप में सिमट जाने की कोशिश और दिल ही दिल में अपने आशिक़ को सबकी, यहाँ तक की ख़ुद आशिक़ की, नज़रों से छुपकर होंठों से छू लेने की ख्वाहिश । सब कुछ बेहद ही शायराना और आशिक़ाना था । हम भी नशे में झूम रहे थे, बेगानी शादी में अब्दुल्ला हो रहे थे । मगर यह जो हमारा चुलबुलापन है ना हमे ज्यादा देर तक अकेला नहीं छोड़ता । सारे हँसते हुए चेहरों के बीच से अचानक वो मुस्कुराता हुआ हमारे पास आया और कानों में फुसफुसाया ‘ अबे, इस दिलफेंक आशिक़ ने बहुत दुनिया देखी और तौली है । माशा अल्लाह! कैसी चालाकी से कह गया ! इतना मासूम यह है नहीं जितना लग रहा है ‘। माहौल में थोड़ा ख़लल हुआ और हमारी रूहानी सी ख़ुशी और मुस्कान शरारत भरी मुस्कान में बदल गयी । हमने किसी तरह ख़ुद को राज की चुटकी लेने से रोका । मन में बहुत जोर हसरत उठी कि सिमरन को भी ‘ दुनिया देखने और तौलने ‘ का आईडिया दे दें और ज्यादा कुछ नहीं तो कम से कम यह तो बता ही दें कि राज इतना भी प्यारा और मासूम नहीं है जितना कि लग रहा है । किसी तरह हम अपनी ही इन शैतान हसरतों से बचते बचाते उस शाम से बाहर निकले ।

बाहर आते हुए हमारे दिल में यही ख्याल चल रहे थे कि यह कहने का अंदाज़ है या सुनने का फेर । कोई कह कुछ भी रहा हो हम सुनते वही हैं जो हम सुनना चाहते हैं । महबूबा चाहे हल्के फुल्के फ़िल्मी गीतों की सुनने वाली हो या फिर गहरी ग़ज़लों की मुरीद हो, कोई फर्क नहीं पड़ता । कोई प्यार से उसके पास बैठकर उसके लिए ग़ज़ल गा दे-

मेरी आँखों ने चुना है तुझको, दुनिया देखकर

किसका चेहरा, अब मैं देखूं, तेरा चेहरा देखकर

वो पहली लाइन अनसुनी करेगी और दूसरी लाइन की गहराई में डूब जाएगी । महबूबा की रातों का चाँद जागा-जागा सा उन ख़ामोश अफ़सानों को सुनता है जो वो आँखों ही आँखों में उसे सुनाती है । जुदाई रात के अंधेरों को और भी बढ़ाने की पुरज़ोर कोशिश करती है । उन आँखों को नींद कैसे आये जो रात के अँधेरे में आशिक़ का चेहरा बनाते और निहारते रहती हैं ? दिल में खलबली मच जाती है । ज़माने से डरते-डराते, छुपते-छुपाते इश्क़ के जादू में दोनों मदहोश हो जाते है । ऐसा होता है मुहब्बत का सुरूर जो एक दिल से दूसरे दिल तक बस निग़ाहों से ही पहुँच जाता है । इसी सुरूर में मदहोश थे मेरे दो दोस्त राज और सिमरन ।

लेकिन कहते हैं ना कि इश्क़ और मुश्क़ छुपाये नहीं छुपते तो कैसे ना तैसे ज़माने को प्यार की खुशबू छू ही जाती है । और शुरू होता है साज़िशों का दौर । कोई उन्हें अलग करने की कोशिश करता है तो कोई उनका हमदर्द बन जाता है । मुहब्बत के इस  सफ़र में इन दोनों की बड़ी अहमियत होती है । जो लोग अलग करने की कोशिश करते हैं वो इश्क़ को दोनों की जिद्द में बदल देते हैं । ऐसी ज़िद जिसके लिए दोनों कोई भी इल्ज़ाम लेने को तैयार हो जाते हैं और आग का दरिया भी उनकी दिल की उमंगों के सामने नहीं टिक पाता । और जो लोग हमदर्द बन कर साथ हो लेते हैं वो ज़िद को जुनून में बदल देते हैं । अक्सर दोस्त होते ही हैं ऐसे जो एक फुद्दू से ख्याल को भी जुनून में बदलवाने का हुनर रखते हैं । देखा जाये तो किसी ने ठीक ही कहा है ..कि हर ज़र्रे ने मुझे तुमसे मिलाने की साज़िश की है । आख़िरकार साज़िशों के शिकार दोनों राज और सिमरन आशिक़ी के चर्चों के साथ शादी के मुक़ाम तक पहुँच गए ।

ऐसी शादी इश्क़ में डूबे दोनों दिल के बहुत ही क़रीब होती है क्यूँकि यह दुश्मन ज़माने के मुहँ पर एक प्यार भरा ज़ोरदार तमाचा होती है । और तमाचे की गूँज पर दुश्मनों को नाचने की भी सज़ा मिलती है , सज-धजकर पूरे बैंड-बाजे के साथ । ऐसी शादी ऐसा तमगा (medal/ trophy) होती है जिसका मुक़ाबला दुनिया में ना कोई ओलंपिक्स का मैडल कर सकता है और ना ऑस्कर की ट्राफी । दोनों की आँखों में जीत के 2000 वॉट के बल्ब जल रहे होते हैं । होंठो पे ऐसी हंसी होती है जैसे सर्दी की रात में अलाव जल रहे हों । शादी दोनों के लिए जीत की जश्न का मुबारक मौका होता है ।

बेशक़, यह मुबारक मौका उनके बीच की आशिक़ी का सबसे ऊँचा मक़ाम होता है । देखिये, फिर हम बखूबी कह गए अब तो उतरना ही एक अकेली गुंजाईश रह गयी है । ख़ुमारी हो या पहाड़, चढ़ने में वक़्त भले ही लगे उतरने में सरपट जमीं पैरों तक आ पहुंचती है । उतरने में पैर फ़िसलने की गुंजाईश भी भरपूर होती है ।

शादी के बाद दोनों को एक दूसरे के साथ रहने और जीने का मौका मिला तो दोनों बेबाक, बिंदास हो गए । अब एक दूसरे को रिझाने की ज़रूरत महसूस नहीं होती और वो दूरियाँ भी सिमट गयी थी जो दोनों को आहें भरने पर मजबूर कर देती थी । जिद्द भी पूरी हो गयी और जुनून भी उतर गया । एक दूसरे पर एक दूसरे का हक़ पूरी क़ायनात ने मान लिया था । एक दूसरे की बाहों में रातों को चैन की नींद आने लगी । धीरे-धीरे खलबली, हलचल, मदहोशी, डर और आशिक़ी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में कहीं खो गयी । ऐसा लगने लगा कि अब पारखी नज़रों ने आराम करने की सोच ली है । किसी की पारखी नज़रों के कायल कब उसी के सूरदास होने का वहम पालने लगे, पता ही नहीं चला ।

अगर सड़क पर चलते हुए आप बिना किसी से टकराए या ठोकर खाए निकल जायें तो आपकी साधारण और सामान्य ज़िन्दगी पे कोई फर्क नहीं पड़ता । आप चले जाते हैं अपने ख्यालों का या फिर अपने टाइमटेबल का हाथ थामे । एक ठोकर की देरी है कि आपका रोम रोम जाग उठता है और आप अपनी पारखी नज़रें खोलते हैं । अगर किस्मत से कोई ऐसा सामने आ जाये जो एक बार फिर से दिल धड़का जाये और आप ठिठक कर देखें कि सारा कारवां रुक गया है तो ?

ऐसा ही हुआ राज के साथ, जब ऑरेंज कुर्ते पर पीला दुपट्टा डाले स्मृति से राज टकरा गया था । स्मृति की आँखों की चमक में वो कुछ देर को खो गया । जब होश लौटा तो स्मृति सामने किसी और से हँसती हुई कुछ बात कर रही थी । दिल में एक चुभन लिए राज आगे बढ़ गया । दिल में बड़ी अजीब सी हलचल मच गयी, क्यूँ हुआ मेरे साथ ऐसा ? क्या मेरे प्यार में कमी आ गयी है ? क्या मुझे मेरे प्यार के बदले अब वैसा प्यार नहीं मिलता ? यह बेवफ़ाई का ज़हर मेरी रगो में कब आ गया ? क्या मैं सिमरन साथ खुश नहीं हूँ ? क्या अब मुझे उसकी ख़ुशी में झूम उठने की हसरत नहीं होती ? मेरे साथ ऐसा क्यूँ हुआ कि मैं ख़ुद से शर्मसार हूँ ? क्यूँ वक़्त ने मुझे ऐसे दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया जहाँ मैं ख़ुद अपना दुश्मन हो गया हूँ ? जिन एहसासों को मैं जी भर अपनी सिमरन के साथ जी चुका , वो आज क्यूँ किसी और के लिए मेरी रगो में दौड़ रहे हैं ? मेरे साथ यह नाइंसाफी क्यूँ ? बार-बार वो अपने बीते कल में जाकर सिमरन के साथ बितायी यादों से ख़ुद को बहलाने की कोशिश कर रहा था ।

दिमाग चाहे जितना संभाले मगर दिल ने कब दिमाग की सुनी है ! दिल तो बेलगाम घोड़े की तरह बार-बार उसी सड़क पर जा पहुंचता है जहाँ नज़र किसी नए से टकरा गयी थी । अपनी सिमरन को धोखा देने का एहसास  राज की साँसों को घोट रहा था और स्मृति का आँचल उसे अपनी तरफ खींच रहा था। आख़िरकार जब ऊँची-ऊँची लहरों से टकराकर वो थक गया और उसमे लड़ने करने की कोई ताक़त नहीं बची तो बेजान सा उसका शरीर, दर्द भरा दिल और बोझिल आँखें हार मान बैठे । वो पहली बार ख़ुद से रोते हुए सच बोला ‘हाँ, मुझे एक बार फिर से प्यार हो गया है’ ।

राज बेचैन सा बालकनी में चक्कर काट रहा था । तभी सिमरन आई और प्यार से उसका हाथ थामकर बोली ‘क्या हुआ ? परेशान लग रहे हो’ । सिमरन के हाथों में उस समय राज को चन्दन सी ठंडक का एहसास हुआ जो सुलगते जख्मों को मलहम की तरह लगा । दुःख के अथाह सागर में हिचकोले लेती राज की ज़िंदगी को जैसे कोई सहारा मिल गया हो । सिमरन की आँखों में जब बड़ी मुद्दत के बाद आज झाँका तो दिल ख़ुशी से पागल हो उठा । अरे! यही तो है वो कशिश जो उस दिन सडक पर मुझसे टकरा गयी थी ! उस पल उसे एहसास हुआ कि स्मृति में उसे अपनी ही सिमरन की झलक दिखी थी तभी तो वो ठिठक गया था । तभी तो वो उसे बेचैन कर गयी । तभी तो उसके सोये हुए और जिए हुए एहसास फिर से जाग उठे । नहीं, मैं बेवफ़ा नहीं हूँ । हो गया है प्यार तुमसे, तुम्ही से एक बार फिर से । शुक्रिया तेरा ऐ ठोकर ,जो मुझे तुमसे मिला गयी एक बार फिर से । ख़ुशी से पागल राज ने छेड़ते हुए सिमरन से पूछा ‘ तुम्हारा वो पीला कुर्ता कहाँ गया जिस पर ऑरेंज दुपट्टा डालकर तुम एकदम जानलेवा लगती हो ‘? सिमरन ने खिलखिलाकर कहा ‘अब कहाँ रही वो बात’ ? राज ने कहा ‘ एक बार पहनो ना, मेरे लिए, प्लीज’ । सिमरन पे जैसे शादी से पहले वाला ही नशा चढ़ गया वो शर्माती हुई बोली ‘ कल जब तुम ऑफिस से लौटोगे तो वही पहने मिलूंगी तुम्हें । अभी तो वो प्रेस नहीं है ’।

हमारा राज इस ढलान पर कुछ देर फिसला और कुछ देर अपने दिल की शाख़ पकड़े लटका रहा अपने आप से जूझते हुए और फिर संभलकर चल दिया जमीं की तरफ, अपनी सिमरन को लेकर फिर से एक नई ऊँचाई के सफ़र पर जाने के लिए ।

एक बार फिर से प्यार जिद्द और जुनून की ऊँचाई पर जा पहुँचा । सिमरन भी हैरान थी अचानक यह खुश मिज़ाजी कैसी ! यह तब्दीली कैसी ! वो ख़ुद भी सहेज चुकी थी इन बेताबियों और बेकरारियों को अपनी यादों के पन्नो में । कैसा ख़ुशनुमा एहसास है ! एक बार फिर से जिया तो लगा कि शादी तो आज हुई है । यह ना किसी को तमाचा है, ना किसी का तमगा । यह तो दो चाहने वालो का एक हो जाने का मुकम्मल मौका है ।

दो सितारों का जमीं पर है मिलन आज की रात

आज की रात ।

🙂

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2 Comments Add yours

  1. Deepak Bisht says:

    Hahahaha a complete bolly kinda story, nice one. Good writting.

    Liked by 1 person

    1. hemasha says:

      :)…bollywood fan

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