ओके मम्मा, नाउ ट्यून चेंज..कायिला ग्लास

धनुष के कोलावेरी कोलावेरी डी गाने में तब मेरे लिए बहुत ही रोमांच आ जाता है जब “ओके मम्मा, नाउ ट्यून चेंज..कायिला ग्लास, ओनली इंग्लिश” वाली पंक्ति आती है | अहा !, मन किलकारियाँ मारते हुए, हिरनी की तरह कुलाँचे भरते समय में सोलह साल पीछे चला जाता है |

आज से सोलह साल पहले लखनऊ की एक बेहद तहजीब, नफ़ासत और नज़ाकत से भरी नवाबजादी, अपने घर को छोड़कर इंदौर पहुँच गयी | “हम” से कभी “मैं” तो कभी “हम” से “अपन”, “आप” से “तू”, “कपड़े भिगोने” से “कपड़े गलाने”, “कपड़े तहाने” से “कपड़े घड़ी करना” और भी ना जाने क्या क्या बदलाव | “चौदहवी का चाँद” गीत सुनाने वाली को “UP वाला ठुमका” गीत सुनाने की फरमाईश ! जैसे इतना बहुत नहीं था हमारे पतन के लिए कि वो भी हो गया |

जब किसी नए कॉलेज में जाते हैं, ख़ासकर प्रोफेशनल पढाई के लिए, वहाँ एक बहुत ही तेज़, कुटिल और ज़हरीला नाग फुफकारता पाया जाता है और उसका नाम होता है- रैगिंग |

अब जो लोग हॉस्टल में नहीं रहते, उन्हें बस दिन में ही इस नाग के साथ बीन लेके अपनी जीवनरक्षा के लिए प्रयासरत रहना होता है | उनका क्या जो दूर शहरों से अपना झोला उठाकर चले आये हैं ? उन्हें आश्रय मिलता है हॉस्टल में | वैसे तो हॉस्टल में वार्डन नाम का सपेरा होता है , लेकिन क्या करें मनुष्य ही है बेचारा ! रात्रि में वो भी सो जाता है | अब सारे नाग ज़रा सी आहट को भांपते हुए सरपट पहुँच जाते हैं अपने शिकार यानि की नए विद्यार्थी के पास | और एक लापरवाह जूनियर पूरे बैच की “ता थैय्या थैय्या थई” करा देता है | उसको फ़रमान मिलता है सबको लेके फ़लाने रूम में आ जाओ | कोई भी इस फ़रमान को चुनौती देने ही हिम्मत नहीं करता | और सब पहुँच जाते हैं ख़ुद को डसवाने | खेला शुरू होता है | नए विधार्थियों को अलग अलग प्रकार के करतब करने होते हैं, क्यूँकी सीनियर्स बस उसे ही बक्शते हैं जो उन्हें देता है “एंटरटेनमेंट एंटरटेनमेंट एंटरटेनमेंट” |

उस दिन एक सीनियर को सहसा डांस का मन हो आया वर्ना तो रोज हम कुछ ना कुछ गाकर बच जाते थे | फिर चाहे वो कैसा भी गाना हो | हमे सीनियर्स की तरफ देखते हुए निर्विकार और बैराग्य भाव से, विश्राम की मुद्रा में दोनों हाथ पीछे कर, खड़े होकर गाना होता था | मिसाल के तौर पर कभी कभी मुझे “याद” को “पाद” से बदल कर गाना होता था |

पाद आ रही है तेरी पाद आ रही है

पादों की बारात निकली है आज दिल के द्वारे

समझदार को इशारा काफ़ी | आगे आप स्वयं समझदार हैं | सभी सीनियर्स की बांछे खिली रहती थी और वो अट्टहास करते थे | लेकिन मुझे सख्त हिदायत थी कि मुस्कान अगर छू भी गयी होंठो या आँखों को तो नतीजा बहुत गंभीर हो सकता है | तो हम बहुत लगन से पूरी इमानदारी से गाते थे |

मगर डांस, यह बड़ी ही विकट समस्या थी हमारे लिए | रिकॉर्ड के तौर पे हमने बस एक बार जीवन में डांस किया था एक ग्रुप में और गीत के बोल थे “कंकड़िया मार के जगाया..कल तू मेरे सपनों में आया..बालमा तू बड़ा वो है” | हम तो बेहद (कंपोज्ड) शांत, धीर और गंभीर प्रकर्ति के थे | यह नाच और अजीबोग़रीब करतब तो कतई हमारी शान के ख़िलाफ़ थे | यह एक डांस परफॉरमेंस हमने कैसे और क्यूँ दी वो भी एक रोचक क़िस्सा है लेकिन वो कभी बाद में सुनायेंगे | अभी इतना ही बता सकते हैं कि हमारे डांस ग्रुप ने शब्दों को हाथ दे दिये थे और बाकी सुर-लय-ताल इसके बारे में हम टिपण्णी ना करें तो बेहतर होगा | एक ही जगह खड़े-खड़े, एक पैर से थाप देके और बोलो के हिसाब से हाथ हिलाके हमने ज्यादातर डांस किया | उस दिन के बाद आज हमसे किसी ने डांस की फरमाईश की | आँखों में आँसू आ गए मगर समझ नहीं आया कि वो अपनी दुर्दशा को सोचकर आये थे या उन सीनियर्स की दुर्दशा को सोचकर | गाना बजना शुरू हुआ “ Vengaboys.. Brasil! La La La La La La La La La La La La La La La La La La La La La La La La Brasil! “

भाई हमने यह गाना उस दिन पहली बार सुना | गाना बहुत ही सुन्दर लगा लेकिन समझ ना आया कि इसमे हाथों से भाव प्रदर्शन कैसे होगा और पैर तो जैसे उठ ही नहीं सकते थे हमारे | समय नहीं था सोचने का और पीछे से एक सीनियर ने गर्जना की कुछ और दें करने को | हाथ-पावँ फूल गए वो सुनकर और अनायास ही हमारे हाथ पैर हिलने लगे | दो हाथ उपर उठा के तली मारी थोड़ी कमर हिलाई और बारी-बारी से एक-एक पैर आगे पीछे करने लगे | थोड़ी देर में मज़ा आने लगा | मगर तभी एक सीनियर को समझ आया कुछ और वो बोली “यही करती रहोगी या कुछ और भी” अब करो या मरो वाली हालत पे हम आ चुके थे | भई हमने आव देखा ना ताव जिधर मन आया हाथ पैर हिलने शुरू कर दिये और कमर भी ठुमकाते जाते थे साथ-साथ | ना जाने कितनी देर वो सिलसिला चला | फिर सीनियर्स को नींद आने लगी और सुबह के तीन बज रहे थे तो हमे जाने का आदेश हुआ | अगले दिन ख़बर आग की तरह कॉलेज तक पहुँच गयी कि बैच में एक नई डांसर आई है | मुझे बहुत लाज आई | पहले तो लगा कि खिचाई हो रही है लेकिन बाद में बहुत ही सुखद आश्चर्य हुआ कि लोग इमानदारी से ऐसा कह रहे थे | और ऐसा मैं इसलिए कह सकती हूँ कि उसी दिन मुझे जूनियर वेलकम कार्यक्रम में डांस परफॉरमेंस तैयार करने को कहा गया |

कैसी अनहोनी थी यह ! मैंने कभी नहीं सोचा, मैं तो कल्पना तक नहीं कर सकती थी कि मैं डांस कर सकती हूँ ! और मुझे सबसे प्यारा वो कॉम्प्लीमेंट है जब मेरे एक दोस्त ने कहा कि उसकी शादी होने वाली है “वो अच्छा डांस करती है लेकिन तुम्हारे जैसी डांसर नहीं है” | अगर हॉस्टल ना होता, वो खुर्राट सीनियर्स नहीं होते और बहुत कुछ ग़लत हो जाने का डर नहीं होता तो मैं अपने पैरों और मन के इस बंधन को कभी नहीं तोड़ पाती | कभी स्वछन्द होकर ख़ुद को व्यक्त नहीं कर पाती और ख़ुशियों को अपने रोम-रोम में महसूस नहीं कर पाती |

हॉस्टल और कॉलेज में रैगिंग होना बहुत ही सामान्य सी बात है और सीनियर्स इसके पीछे तर्क देते हैं कि इससे झिझक दूर हो जाती है | मैं यह कहूँगी कि यदि यह कारवाही बिना किसी को शारीरिक चोट पहुंचाए, उसको मानसिक यातना दिये बिना और सचमुच बस झिझक दूर करने के उद्देश्य से की जाये तो सचमुच यह मदद करती है | आप अपने ही कई पहलुओं से अनजान होते हैं इस दौर में आप ख़ुद से बहुत करीब से मिलते हैं | और नई जगह में अतातियों के बीच घिरे हुए सारे बैच वाले आपको अपने लगते हैं | सीनियर्स का अत्याचार नए बैच को एकता के सूत्र में बांधने के काम आता है | और कई बार तो इन सीनियर्स में से कई जीवन भर के लिए दोस्त और मार्गदर्शक बन जाते हैं |

स्थिति तब बुरी होती है जब यह अपनी मर्यादाएँ तोड़कर अभद्रता की तरफ बढ़ने लगती है | जब सीनियर्स जूनियर में व्यक्ति नहीं बस एक बेजान खिलौना देखने लगते हैं | जब सीनियर्स मनुष्यता छोड़ पाशविक प्रवति अपना लेते हैं | कोई प्रथा ना पूरी तरह से बुरी होती है और ना पूरी तरह से सही | यह तो हर व्यक्ति के विवेक पे आधारित होता है कि वह उसे किस तरह देखता है और आगे बढाता है |

मेरा मेरे देश के सभी तरुणों और नए नए व्यस्क हुए नागरिकों से अनुरोध है कि आप अपना विवेक अच्छे ढंग से प्रयोग करें | अपने मानवीय स्तर को ना गिराएँ और किसी दूसरे मनुष्य की गरिमा को खंडित ना करें | हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण करना चाहते हैं और हमे आपसे बहुत आशाएँ हैं | सभी परिस्थितियों में धैर्य, मानवीयता और विवेक का हाथ थामे रहें और जीवनपर्यंत जिन यादों को संजोकर रख सके ऐसे घटनाक्रम में अपना सहयोग दें और दूसरों को सम्मिलित करें |

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्।।

🙂

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